राजस्थान के बानसूर में बाप-बेटे ने दिखाई अनोखी मिसाल: दहेज के 31 लाख रुपये लौटाए, कहा - "बेटी से बड़ा कोई धन नहीं"
राजस्थान के बानसूर (बिलाली गांव) में 10 फरवरी को वीरेंद्र शेखावत की शादी में दूल्हे के पिता जालिम सिंह ने दुल्हन विशाखा के पिता द्वारा दिए गए 31 लाख रुपये दहेज को पूरी तरह ठुकरा दिया और वापस लौटा दिया। उन्होंने कहा कि "बेटी ही सबसे बड़ा दहेज है, कोई धन इससे कीमती नहीं"। यह घटना दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत संदेश दे रही है और इलाके में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। दूल्हा एयरफोर्स में तैनात है और परिवार साधारण पृष्ठभूमि से है।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर क्षेत्र के बिलाली गांव में एक ऐसी शादी हुई, जिसने न केवल इलाके में सुर्खियां बटोरीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी दिया। यहां दूल्हे और उसके पिता ने दहेज के रूप में दी गई 31 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि को पूरी तरह ठुकरा दिया और उसे वापस लौटा दिया। इस घटना ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाई है और आसपास के गांवों में इसकी खूब चर्चा हो रही है।
घटना का पूरा विवरण
10 फरवरी को बिलाली गांव के रहने वाले जालिम सिंह ने अपने बेटे वीरेंद्र शेखावत की शादी के लिए बारात नागौर जिले के लुणसरा गांव ले जाई थी। दुल्हन विशाखा राठौड़ के पिता करणी सिंह राठौड़ ने विवाह समारोह के दौरान परंपरा के अनुसार दहेज के तौर पर 31 लाख रुपये देने की पेशकश की।