बाड़मेर में डोडा-पोस्त के सरकारी ठेके फिर शुरू करने की मांग तेज: कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, नारेबाजी और CM को ज्ञापन
बाड़मेर जिले में ग्रामीणों और बुजुर्गों ने 2016 से बंद पड़े डोडा-पोस्त के सरकारी ठेकों को फिर शुरू करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने "डोडा-पोस्त की दुकानें शुरू करो" के नारे लगाए और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उनका तर्क है कि प्रतिबंध से काली बाजारी बढ़ी, युवा एमडी-स्मैक जैसी खतरनाक दवाओं की ओर मुड़ गए, जबकि बुजुर्ग पारंपरिक डोडा-पोस्त से वंचित हो गए। वे मांग कर रहे हैं कि वैध लाइसेंसी दुकानें खोलकर अवैध तस्करी रोकी जाए।
बाड़मेर, राजस्थान: राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों ने करीब 10 वर्षों से बंद पड़े डोडा-पोस्त (पॉपी हस्क) के सरकारी ठेकों को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। शुक्रवार को सैकड़ों ग्रामीण महावीर पार्क में एकत्र हुए और "डोडा-पोस्त की दुकानें शुरू करो" जैसे नारे लगाते हुए रैली निकाली। रैली कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य यह है कि 2016 में लगाए गए प्रतिबंध के कारण बुजुर्गों और आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी ठेके बंद होने से डोडा-पोस्त की काली बाजारी और तस्करी बढ़ गई है, जिसके चलते युवा अवैध नशीले पदार्थों जैसे एमडी (मेथामफेटामाइन) और स्मैक की ओर मुड़ रहे हैं।