शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्राथमिक जांच की। बताया जा रहा है कि जांच में शिकायत सही पाई गई थी। इसके बाद 22 मई को प्रभुलाल कुम्हार को मामले के संबंध में बनेड़ा थाने बुलाया गया।
शिकायत सुनने के बजाय गाली-गलौज का आरोप
प्रभुलाल कुम्हार का आरोप है कि थाने में उनकी शिकायत सुनने के बजाय थानाधिकारी ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि जब उन्होंने कानून और अपने अधिकारों की बात की तो SHO नाराज हो गए और उन्हें डराने-धमकाने लगे।
फरियादी ने एसपी को दी शिकायत में आरोप लगाया कि उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया और उन्हें न्याय दिलाने के बजाय दबाव बनाने की कोशिश की गई।
पांच घंटे तक थाने में बंद रखने का आरोप
फरियादी का आरोप है कि उन्हें शांति भंग की कार्रवाई के नाम पर दोपहर करीब 1 बजे से शाम 6 बजे तक थाने में रखा गया। बाद में उन्हें तहसीलदार के समक्ष पेश कर पाबंद कराया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसी दौरान विपक्षी पक्ष को उनकी जमीन पर कब्जा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। जब उन्होंने उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही तो उन्हें धमकाया गया।
वायरल वीडियो में क्या सुनाई दिया?
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कथित तौर पर थानाधिकारी कुछ विवादित टिप्पणियां करते हुए सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में जमीन पर कब्जे को लेकर की गई बातचीत और कथित तौर पर विपक्षी पक्ष को प्रोत्साहित करने जैसी बातें सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
SHO ने आरोपों को बताया गलत
मामले में थानाधिकारी बच्छराज चौधरी का कहना है कि गांव में जमीन और रास्ते को लेकर विवाद था। दोनों पक्षों को थाने बुलाकर समझाइश दी गई थी।
उनका कहना है कि फरियादी अपने खेत और बाड़े का गेट दूसरे पक्ष के घर के सामने निकालना चाहता था, जिसको लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। SHO ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर भी अपना पक्ष रखा है।
एसपी ने लिया एक्शन, ASP को सौंपी जांच
वीडियो सामने आने और शिकायत मिलने के बाद भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए SHO बच्छराज चौधरी को लाइन हाजिर कर दिया। साथ ही पूरे मामले की जांच ASP हेमंत कुमार को सौंप दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बनेड़ा थाना विवाद ने एक बार फिर पुलिस के व्यवहार और फरियादियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर फरियादी गंभीर आरोप लगा रहा है तो दूसरी ओर पुलिस अधिकारी अपना पक्ष रख रहे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।