भुसावर के नंदघरों में अभिभावक बैठक: बच्चों के समग्र विकास पर जोर, स्वच्छता-अच्छी आदतों और यातायात नियमों की दी गई जानकारी
भरतपुर के भुसावर क्षेत्र में नंदघरों में अभिभावक बैठक आयोजित की गई। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन व अर्पण सेवा संस्थान के सहयोग से बच्चों को स्वच्छता, अच्छी आदतें, पौष्टिक आहार और यातायात नियमों की जानकारी दी गई। सैकड़ों अभिभावकों ने हिस्सा लिया।
भरतपुर/भुसावर, 20 नवंबर 2025: भरतपुर जिले के भुसावर सहित आसपास के अंचलों में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित नंदघरों में एक महत्वपूर्ण अभिभावक बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक बच्चों के समग्र विकास, स्वास्थ्य और सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन और अर्पण सेवा संस्थान की सक्रिय सहायता से हुई इस पहल ने स्थानीय अभिभावकों को एक मंच प्रदान किया, जहां उन्होंने न केवल अपने बच्चों की प्रगति पर चर्चा की, बल्कि उन्हें स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जीने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्राप्त किए।नंदघर, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल के केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं, आजकल सामाजिक जागरूकता के महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। भुसावर क्षेत्र में संचालित इन नंदघरों में कुल 15 से अधिक इकाइयों में यह बैठक आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों अभिभावक, नंदघर संचालकाएं और विभागीय अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस बच्चों को स्वच्छता, अच्छी आदतों और यातायात नियमों की जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे बचपन से ही जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
बैठक का विस्तृत विवरण और मुख्य संदेश; बैठक की शुरुआत नंदघरों में बच्चों के दैनिक गतिविधियों की समीक्षा से हुई। संचालिकाओं ने अभिभावकों को बताया कि नंदघरों में बच्चे न केवल खेल-कूद और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेते हैं, बल्कि उन्हें पोषण, स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है। इस अवसर पर वितरित किए गए मुख्य संदेश निम्नलिखित थे:स्वच्छता अभियान पर जोर: अभिभावकों को हाथ धोने, नाखून साफ रखने और घर-आंगन की सफाई जैसे बुनियादी स्वच्छता नियमों के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि स्वच्छता से न केवल बीमारियां दूर रहती हैं, बल्कि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी तेज होता है। एक संचालिका ने कहा, "बच्चे जब स्वच्छ रहते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।" अच्छी आदतें विकसित करना: बैठक में अच्छी आदतों जैसे समय पर सोना-जागना, नियमित भोजन करना, किताबें पढ़ना और दूसरों की मदद करना पर चर्चा हुई। अभिभावकों को सलाह दी गई कि वे घर पर इन आदतों को लागू करें, ताकि बच्चे अनुशासित और सकारात्मक सोच वाले बनें। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने एक छोटी कार्यशाला आयोजित की, जिसमें अभिभावकों को बच्चों के साथ दैनिक रूटीन चार्ट बनाने की ट्रेनिंग दी गई। यातायात नियमों की जानकारी: ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते वाहनों के कारण दुर्घटनाओं को देखते हुए, यातायात सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। बच्चों को हेलमेट पहनने, पैदल चलते समय सड़क के किनारे रहने और लाल बत्ती पर रुकने जैसे नियम सिखाए गए। विभागीय अधिकारी ने चेतावनी दी कि "छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़े हादसों का कारण बन सकती हैं। अभिभावक ही बच्चों के पहले शिक्षक हैं, इसलिए घर से ही यह शिक्षा दें।"
