जोधपुर के AIIMS रोड पर अतिक्रमण हटाने का हाईकोर्ट ने दिया सख्त निर्देश: 9 दिसंबर तक अवैध कब्जे हटाएं, भारी वाहनों पर समयबद्ध पाबंदी
राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर के एम्स रोड पर 9 दिसंबर तक सभी अवैध अतिक्रमण हटाने और सुबह 7 से रात 11 बजे तक भारी वाहनों पर पाबंदी लगाने का सख्त आदेश दिया।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर के अत्यंत व्यस्त और महत्वपूर्ण AIIMS रोड पर फैले अवैध अतिक्रमणों को हटाने के लिए स्थानीय प्रशासन को कड़ा निर्देश जारी किया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंगी की खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया, जिसमें 9 दिसंबर 2025 तक सभी अवैध कब्जों को पूर्ण रूप से हटाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने न केवल अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया, बल्कि सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया है। यह निर्णय स्वास्थ्य सेवाओं को सुगम बनाने और सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि: याचिका से कोर्ट पहुंचा विवाद यह मामला जोधपुर के AIIMS (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) रोड पर लंबे समय से चली आ रही अतिक्रमण समस्या से जुड़ा है। AIIMS रोड, जो शहर के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र को जोड़ता है, पर दुकानदारों, ठेलेवालों और अन्य अवैध कब्जेदारों ने सड़क के किनारे तथा मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण कर रखे हैं। इससे न केवल एम्स आने-जाने वाले मरीजों, परिजनों और एम्बुलेंस को परेशानी होती है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।याचिका जिला कलेक्टर जोधपुर को पक्षकार बनाकर दायर की गई थी, जिसमें अतिक्रमण हटाने और सड़क को सुगम बनाने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि AIIMS गेट नंबर 3 और 4 के आगे मुख्य सड़क पर अवैध निर्माण, ठेले और अन्य कब्जे फैले हुए हैं, जो एम्स कैंपस के प्रवेश द्वार को अवरुद्ध कर रहे हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि ये अतिक्रमण न केवल ट्रैफिक जाम का कारण बनते हैं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को भी बाधित करते हैं। कोर्ट ने पिछले सुनवाइयों में प्रशासन को कई बार नोटिस जारी कर चेतावनी दी थी, लेकिन कार्रवाई में देरी के कारण यह सख्त आदेश आया।खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्रशासन के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें अतिक्रमणों की संख्या, स्थान और हटाने की योजना का जिक्र था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि AIIMS जैसी प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान के आसपास ऐसी अव्यवस्था स्वीकार्य नहीं है, खासकर जब यह लाखों लोगों की जान से जुड़ा मामला हो।