इसी बीच ड्रग एंड कंट्रोल विभाग ने न्यू मेडिकल हॉस्पिटल और जेके लोन हॉस्पिटल से कुल 33 दवाइयों और मेडिकल सामग्री के सैंपल जांच के लिए लिए हैं। इनमें से 9 सर्जिकल सैंपल विशेष जांच के लिए प्लेन के जरिए कोलकाता लैब भेजे गए हैं। इनकी रिपोर्ट लगभग 14 दिन में आने की संभावना है।
सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र गर्ग ने बताया कि न्यू मेडिकल हॉस्पिटल से 23 ड्रग मेडिसिन के 24 सैंपल लिए गए हैं। इनमें 15 सरकारी सप्लाई और 9 लोकल खरीद के सैंपल शामिल हैं। वहीं जेके लोन हॉस्पिटल से 9 सैंपल लिए गए, जिनमें 5 सरकारी सप्लाई और 4 लोकल खरीद के हैं।
उन्होंने बताया कि दोनों अस्पतालों में सरकारी सप्लाई की दवाइयां समान थीं, लेकिन उनके बैच अलग-अलग थे। इसलिए अलग-अलग बैच के सभी सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
किन दवाइयों की हो रही जांच
न्यू मेडिकल हॉस्पिटल से जिन दवाइयों के सैंपल लिए गए हैं उनमें फ्यूरोसेमाइड इंजेक्शन, डेक्सट्रोज इंजेक्शन, अमिकासिन इंजेक्शन, ट्रानेक्सेमिक एसिड, मेट्रोनिडाजोल, रिंगर लैक्टेट, सेफ्ट्रियाक्सोन इंजेक्शन और मेटोक्लोप्रामाइड जैसी दवाइयां शामिल हैं।
इसके अलावा लोकल खरीद में उपयोग की गई दवाइयों और सर्जिकल सामग्री जैसे ट्रामाडोल इंजेक्शन, ओन्डैनसेट्रॉन, बुपिवाकेन इंजेक्शन, आईवी कैथेटर और डिस्पोजेबल सिरिंज के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
जेके लोन हॉस्पिटल से भी रिंगर लैक्टेट, सोडियम क्लोराइड, रेनिटिडिन इंजेक्शन और अन्य मेडिकल उपकरणों के सैंपल लिए गए हैं।
कोलकाता भेजे गए सर्जिकल सैंपल
देवेंद्र गर्ग ने बताया कि 9 सर्जिकल सैंपल सोमवार को हवाई मार्ग से कोलकाता लैब भेजे गए हैं। इनकी जांच में समय लगेगा और करीब 14 दिन बाद रिपोर्ट मिलने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि दवाओं के सैंपल जयपुर लैब में जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की वजह दवा का रिएक्शन था, संक्रमण था या कोई अन्य तकनीकी कारण।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
सहायक औषधि नियंत्रक ने बताया कि साल 2010-11 में जोधपुर में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। उस समय भी आईवी फ्लूड और अन्य सर्जिकल सामग्री के सैंपल कोलकाता भेजे गए थे। जांच में एक सैंपल फेल पाया गया था।
अब तक 4 महिलाओं की मौत
कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में 4 और 5 मई को कुल 12 प्रक्रियाएं हुई थीं, जिनमें 10 सिजेरियन डिलीवरी शामिल थीं। इनमें से 6 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी और 48 घंटे के भीतर दो महिलाओं की मौत हो गई।
वहीं जेके लोन हॉस्पिटल में 8 और 9 मई को भर्ती हुई महिलाओं में भी सिजेरियन के बाद 5 महिलाओं की हालत बिगड़ी थी। इनमें दो महिलाएं हाई रिस्क मरीज थीं।
बूंदी निवासी प्रिया की मौत हार्ट फेल्योर से हुई, जबकि पिंकी महावर की सिजेरियन डिलीवरी के बाद यूरिन आउटपुट बंद हो गया था। इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
समान लक्षणों से बढ़ी चिंता
डॉक्टरों के अनुसार जेके लोन हॉस्पिटल से शिफ्ट हुई महिलाओं में भी वही लक्षण दिखाई दिए हैं, जो न्यू मेडिकल हॉस्पिटल की महिलाओं में पाए गए थे। इससे मामला और गंभीर हो गया है।
कोटा और जयपुर की विशेषज्ञ टीम लगातार कारणों की जांच कर रही है। स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित बैच की दवाइयों के उपयोग पर रोक लगा दी है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव पहुंचीं कोटा
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ सोमवार रात कोटा पहुंचीं। उन्होंने अस्पताल का दौरा किया और अधिकारियों से जानकारी ली।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह जांच की जा रही है कि मामला दवा के रिएक्शन का है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। उन्होंने बताया कि कल्चर रिपोर्ट नेगेटिव आई है, लेकिन केमिकल एनालिसिस अभी बाकी है।
उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया लंबी होती है और अलग-अलग केमिकल रिएक्शन की जांच में अलग समय लगता है। फिलहाल सैंपल्स का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है।
सरकार पर उठे सवाल
इस मामले को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने प्रसूताओं की मौत को लेकर अपनी ही सरकार के स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चिकित्सा मंत्री को पत्र लिखकर अस्पताल प्रशासन और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल पूरे मामले में जांच जारी है और अब सभी की नजर लैब रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे मौतों और महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की असली वजह सामने आ सके।