पिता की चिता ठंडी होने से पहले बेटे की भी सजानी पड़ी चिता, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़.
कोटा के हरिओम नगर में एक मजदूर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लकवे से पीड़ित पिता पूरी लाल बैरवा (50) की मंगलवार को मौत हो गई। उनके अंतिम संस्कार के महज दो घंटे बाद, पिता के गम में डूबे बेटे राजू बैरवा (25) को हार्ट अटैक ने छीन लिया। गरीब परिवार के लिए दो चिताओं का खर्च उठाना मुश्किल था, लेकिन पड़ोसियों ने चंदा जुटाकर अंतिम संस्कार कराया। अब मां गुड्डी और 13 साल का बेटा अरविंद अकेले रह गए, जिनके सामने अनिश्चित भविष्य है। यह हृदयविदारक घटना हर किसी को झकझोर गई।
राजस्थान के कोटा शहर के हरिओम नगर कच्ची बस्ती में एक ऐसी दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर सुनने वाले की आंखें नम कर दीं। एक मजदूर परिवार के सिर पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब पिता की मौत के कुछ ही घंटों बाद उनके जवान बेटे ने भी हार्ट अटैक के कारण दम तोड़ दिया। इस गरीब परिवार की आर्थिक तंगी ऐसी थी कि दोनों के अंतिम संस्कार के लिए आसपास के लोगों को चंदा जुटाना पड़ा। यह कहानी न केवल दुख और हानि की है, बल्कि मानवीय संवेदना और सामुदायिक एकजुटता की भी मिसाल है।
पिता की लकवे से मौत, शुरू हुआ दुख का सिलसिला
हरिओम नगर कच्ची बस्ती में रहने वाले पूरी लाल बैरवा (50) एक मेहनतकश मजदूर थे, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। कई दिनों से वह लकवे की बीमारी से जूझ रहे थे। मंगलवार को उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने अंतिम सांस ले ली। परिवार ने गमगीन माहौल में पूरी लाल का अंतिम संस्कार किया, लेकिन यह दुख उनके लिए बस शुरुआत थी।