राजस्थान: शहीद पवन प्रजापति का खेरखेड़ा में अंतिम संस्कार, 5 साल के बेटे ने दी पिता को अग्नि

झालावाड़ के सैनिक पवन प्रजापति, जो असम में आर्मी सप्लाई कोर में तैनात थे, की गुरुवार रात ट्रेन हादसे में मृत्यु हो गई। रविवार को उनके पैतृक गांव खेरखेड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके 5 साल के बेटे ने दादा की गोद में बैठकर पिता को मुखाग्नि दी, जिससे सभी की आंखें नम हो गईं। पवन की पार्थिव देह शनिवार को असम से जयपुर और फिर झालावाड़ लाई गई। असनावर से खेरखेड़ा तक 8 किमी की तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें लोग "भारत माता की जय" के नारे लगाते रहे। 21 तोपों की सलामी के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। पवन के परिवार में पत्नी, 5 साल और 6 महीने के दो बेटे हैं। शहीद का दर्जा देने की प्रक्रिया में दो महीने लग सकते हैं।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
June 22, 2025 • 4:02 PM  127
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राजस्थान: शहीद पवन प्रजापति का खेरखेड़ा में अंतिम संस्कार, 5 साल के बेटे ने दी पिता को अग्नि
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राजस्थान: शहीद पवन प्रजापति का खेरखेड़ा में अंतिम संस्कार, 5 साल के बेटे ने दी पिता को अग्नि

असम में तैनात झालावाड़ के वीर सैनिक पवन प्रजापति का रविवार को उनके पैतृक गांव खेरखेड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके 5 साल के मासूम बेटे ने दादा की गोद में बैठकर पिता को मुखाग्नि दी। यह हृदयविदारक दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

असम में आर्मी सप्लाई कोर यूनिट में कार्यरत पवन प्रजापति की गुरुवार रात एक दुखद ट्रेन हादसे में मृत्यु हो गई थी। नायब सूबेदार ज्योतिष कुमार जीपी ने बताया कि असम के सोहनपुर जिले के ओल्ड मिसामिरी रेलवे स्टेशन पर रेल यात्रा के दौरान पवन का संतुलन बिगड़ गया और वे ट्रेन से गिर पड़े। इस हादसे में उनके सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। सेना की यूनिट को सूचना मिलते ही उन्हें तुरंत गुरुबंदा सिविल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद उनकी पार्थिव देह शनिवार दोपहर विमान से असम से जयपुर पहुंची। वहां से सड़क मार्ग के जरिए इसे शनिवार शाम झालावाड़ लाया गया और मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रखा गया।

रविवार सुबह पवन की पार्थिव देह को उनके पैतृक गांव खेरखेड़ा ले जाया गया। उनकी रेजिमेंट के सदस्यों ने असनावर से खेरखेड़ा तक तिरंगा यात्रा निकाली। करीब 8 किलोमीटर की इस यात्रा में लोग "भारत माता की जय" और "शहीद अमर रहे" के नारे लगाते हुए पुष्प वर्षा करते रहे। गांव पहुंचने पर तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह को उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। पति की पार्थिव देह देखकर पत्नी बेसुध हो गईं। अन्य महिलाओं ने उन्हें संभाला। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, और हर किसी की आंखें गम में डूबी थीं।

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