स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस अतिक्रमण को लेकर नगर परिषद और संबंधित विभागों को कई बार सूचित किया। इसके बावजूद शुरुआती स्तर पर न तो कोई निरीक्षण किया गया और न ही निर्माण कार्य रुकवाया गया। लोगों के अनुसार, इस लापरवाही के चलते अतिक्रमणकारियों के हौसले और बढ़ गए और सरकारी जमीन पर कब्जा लगातार बढ़ता गया।
आरोप है कि नगर परिषद की जमीन पर अवैध तरीके से चारदीवारी और अन्य निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब खुलेआम हो रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।
मौके पर नहीं पहुंचे अधिकारी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायतों के बावजूद नगर परिषद के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि सरकारी जमीन पर कब्जा होने के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है।
आयुक्त का बयान
नगर परिषद आयुक्त ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें इस अतिक्रमण की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए टीम को निर्देश दिए गए हैं। आयुक्त ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तुरंत हटाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जालोर में सरकारी जमीन पर कब्जे का यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोग अब जल्द से जल्द कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे हैं।