पचपदरा रिफाइनरी: पीएम दौरे के बीच जारी रहा ‘क्रेडिट वॉर’, गरमाई BJP बनाम कांग्रेस की सियासत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बालोतरा दौरे से पहले राजस्थान की राजनीति गरमा गई है।




T 78:- PM नरेंद्र मोदी ने दी राजस्थान को विकास कार्यों की सौगात pic.twitter.com/LsrjDDndK0 — Ashok Shera (@ashokshera94) July 4, 2026
बालोतरा के पचपदरा में देश की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बीच राजस्थान की सियासत पूरी तरह गर्म रही। इस ऐतिहासिक परियोजना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच ‘क्रेडिट वॉर’ खुलकर सामने आ गया।
आज राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि प्रदेश की पहली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी का उद्घाटन आज होने जा रहा है।
मुझे संतोष है कि हमारी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई परियोजना आज क्रियाशील होने जा रही है।
2008 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ही राज्य में… pic.twitter.com/4unrWPY2fS— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) July 4, 2026
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि इस परियोजना की नींव कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी और यूपीए शासन के दौरान इसे आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि 2013 में शिलान्यास के बाद राजनीतिक कारणों से परियोजना में देरी हुई, जिससे लागत में भी भारी बढ़ोतरी हुई।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को स्वयं के राज्य की इतनी बड़ी परियोजना पचपदरा रिफाइनरी के इतिहास और शिलान्यास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। मीडिया के समक्ष उनका यह दावा कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था, पूरी तरह से… pic.twitter.com/zt3OwT1wj4 — Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) July 3, 2026
गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय परियोजना को गति मिली और 85 प्रतिशत तक काम पूरा कराया गया, जबकि पेट्रोकेमिकल जोन जैसी योजनाएं अब भी अधूरी हैं।
वहीं, भाजपा ने गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तेजी से पूरी हुई और राज्य सरकार ने विकास को प्राथमिकता दी है। भाजपा ने कांग्रेस पर परियोजना को लेकर भ्रम फैलाने और देरी के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रिफाइनरी का लोकार्पण जहां राजस्थान के औद्योगिक विकास के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, वहीं इसके श्रेय को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 4 जुलाई को प्रस्तावित बालोतरा दौरे और एचआरआरएल (HRRL) पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण से पहले राजस्थान की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। एक तरफ बायतु विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया के जरिए थार क्षेत्र के विकास से जुड़ी दो अहम मांगें प्रधानमंत्री के सामने रखी हैं, तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने रिफाइनरी के इतिहास, क्रेडिट और परियोजना में हुई देरी को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
हरीश चौधरी बोले- निमंत्रण नहीं मिला, इसलिए सोशल मीडिया से रखीं मांगें
बायतु विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का थार क्षेत्र में स्वागत करते हुए लिखा कि स्थानीय विधायक होने के बावजूद उन्हें कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसी माध्यम से वे क्षेत्र की जनता की आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने पहली मांग में कहा कि रिफाइनरी जैसी बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत मिलने वाली राशि में हुई कटौती पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि स्थानीय विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकें।
दूसरी मांग में उन्होंने एचआरआरएल रिफाइनरी से जुड़े प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल ज़ोन के विकास के लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर टैक्स में छूट देने की मांग की। उनका कहना है कि इससे नए उद्योग स्थापित होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को स्वयं के राज्य की इतनी बड़ी परियोजना पचपदरा रिफाइनरी के इतिहास और शिलान्यास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। मीडिया के समक्ष उनका यह दावा कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था, पूरी तरह से… pic.twitter.com/zt3OwT1wj4 — Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) July 3, 2026
रिफाइनरी के इतिहास पर गहलोत का पलटवार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान के बाद विवाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि पचपदरा रिफाइनरी का शिलान्यास वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि परियोजना का वास्तविक शिलान्यास वर्ष 2013 में तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली की मौजूदगी में हुआ था।
गहलोत ने वर्ष 2013 की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद परियोजना करीब पांच वर्षों तक ठप रही, जिसके कारण इसकी लागत लगभग 37 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित कर एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) के संयुक्त उद्यम का गठन कराया था।
T 36 :- पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण से पहले सियासत तेज, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बीजेपी पर साधा निशाना
पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण से से पहले राजस्थान की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि इस परियोजना की शुरुआत यूपीए सरकार के समय हुई थी और कांग्रेस… pic.twitter.com/CLHoLraUYE — Ashok Shera (@ashokshera94) July 4, 2026
टीकाराम जूली ने भी बीजेपी सरकार को घेरा
पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण से पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुई थी और कांग्रेस सरकार के समय इसका लगभग 80 से 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका था। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी का लोकार्पण स्वागतयोग्य है, लेकिन इसका पूरा श्रेय केवल बीजेपी नहीं ले सकती।
जूली ने मांग की कि बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर और पूरे मारवाड़ के स्थानीय युवाओं को रिफाइनरी में रोजगार के अवसरों में पहली प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नाम पर बाड़मेर में पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी स्थापित करने की मांग रखते हुए कहा कि इससे युवाओं को पेट्रोलियम क्षेत्र में उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने रिफाइनरी के आसपास औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी थी। अब राज्य और केंद्र सरकार को लॉजिस्टिक्स, सहायक उद्योगों और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देकर इस परियोजना का अधिकतम लाभ राजस्थान को दिलाना चाहिए।
लागत बढ़ने और अधूरे वादों का मुद्दा भी उठाया
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि जिस परियोजना की शुरुआती लागत करीब 39 हजार करोड़ रुपये थी, वह अब बढ़कर 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। उनके अनुसार, परियोजना में हुई देरी का आर्थिक बोझ जनता पर पड़ा और यदि इसे समय पर पूरा किया जाता तो प्रदेश को इसका लाभ वर्षों पहले मिल जाता।
उन्होंने बीजेपी सरकार पर चुनावी वादों को लेकर भी सवाल उठाए। जूली ने कहा कि ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा, पेपर लीक पर रोक और हरियाणा के बराबर पेट्रोल-डीजल के दाम जैसे वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने ईआरसीपी के लिए अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं दी, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद आम जनता को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में राहत नहीं मिली।
T 40 :- बनकर तैयार है पचपदरा रिफाइनरी.. pic.twitter.com/08p8juWxhW — Ashok Shera (@ashokshera94) July 4, 2026
बालोतरा दौरे पर सियासी नजरें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बालोतरा दौरा ऐसे समय हो रहा है जब एचआरआरएल रिफाइनरी का लोकार्पण पश्चिमी राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
Tomorrow’s programme in Balotra will be historic, marking the inauguration and laying of foundation stones of works worth over Rs. 1.06 lakh crore. This includes the dedication of the integrated refinery-cum-petrochemical complex at Pachpadra. This project will boost India’s… pic.twitter.com/coYf1sxQsH — Narendra Modi (@narendramodi) July 3, 2026
हालांकि उद्घाटन से पहले ही रिफाइनरी के इतिहास, उसके क्रेडिट, परियोजना में हुई देरी, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास को लेकर सियासत चरम पर पहुंच गई है। ऐसे में प्रधानमंत्री के दौरे के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी भी प्रदेश की राजनीति का बड़ा केंद्र बनी हुई है।











































