प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 4 जुलाई को प्रस्तावित बालोतरा दौरे और एचआरआरएल (HRRL) पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण से पहले राजस्थान की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। एक तरफ बायतु विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया के जरिए थार क्षेत्र के विकास से जुड़ी दो अहम मांगें प्रधानमंत्री के सामने रखी हैं, तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने रिफाइनरी के इतिहास, क्रेडिट और परियोजना में हुई देरी को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
बायतु विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का थार क्षेत्र में स्वागत करते हुए लिखा कि स्थानीय विधायक होने के बावजूद उन्हें कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसी माध्यम से वे क्षेत्र की जनता की आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने पहली मांग में कहा कि रिफाइनरी जैसी बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत मिलने वाली राशि में हुई कटौती पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि स्थानीय विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकें।
दूसरी मांग में उन्होंने एचआरआरएल रिफाइनरी से जुड़े प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल ज़ोन के विकास के लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर टैक्स में छूट देने की मांग की। उनका कहना है कि इससे नए उद्योग स्थापित होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
रिफाइनरी के इतिहास पर गहलोत का पलटवार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान के बाद विवाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि पचपदरा रिफाइनरी का शिलान्यास वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि परियोजना का वास्तविक शिलान्यास वर्ष 2013 में तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली की मौजूदगी में हुआ था।
गहलोत ने वर्ष 2013 की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद परियोजना करीब पांच वर्षों तक ठप रही, जिसके कारण इसकी लागत लगभग 37 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित कर एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) के संयुक्त उद्यम का गठन कराया था।
टीकाराम जूली ने भी बीजेपी सरकार को घेरा
पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण से पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुई थी और कांग्रेस सरकार के समय इसका लगभग 80 से 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका था। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी का लोकार्पण स्वागतयोग्य है, लेकिन इसका पूरा श्रेय केवल बीजेपी नहीं ले सकती।
जूली ने मांग की कि बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर और पूरे मारवाड़ के स्थानीय युवाओं को रिफाइनरी में रोजगार के अवसरों में पहली प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नाम पर बाड़मेर में पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी स्थापित करने की मांग रखते हुए कहा कि इससे युवाओं को पेट्रोलियम क्षेत्र में उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने रिफाइनरी के आसपास औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी थी। अब राज्य और केंद्र सरकार को लॉजिस्टिक्स, सहायक उद्योगों और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देकर इस परियोजना का अधिकतम लाभ राजस्थान को दिलाना चाहिए।
लागत बढ़ने और अधूरे वादों का मुद्दा भी उठाया
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि जिस परियोजना की शुरुआती लागत करीब 39 हजार करोड़ रुपये थी, वह अब बढ़कर 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। उनके अनुसार, परियोजना में हुई देरी का आर्थिक बोझ जनता पर पड़ा और यदि इसे समय पर पूरा किया जाता तो प्रदेश को इसका लाभ वर्षों पहले मिल जाता।
उन्होंने बीजेपी सरकार पर चुनावी वादों को लेकर भी सवाल उठाए। जूली ने कहा कि ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा, पेपर लीक पर रोक और हरियाणा के बराबर पेट्रोल-डीजल के दाम जैसे वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने ईआरसीपी के लिए अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं दी, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद आम जनता को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में राहत नहीं मिली।
बालोतरा दौरे पर सियासी नजरें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बालोतरा दौरा ऐसे समय हो रहा है जब एचआरआरएल रिफाइनरी का लोकार्पण पश्चिमी राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
हालांकि उद्घाटन से पहले ही रिफाइनरी के इतिहास, उसके क्रेडिट, परियोजना में हुई देरी, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास को लेकर सियासत चरम पर पहुंच गई है। ऐसे में प्रधानमंत्री के दौरे के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी भी प्रदेश की राजनीति का बड़ा केंद्र बनी हुई है।