PM मोदी के बालोतरा दौरे से पहले सियासी संग्राम: हरीश चौधरी ने रखीं दो बड़ी मांगें, रिफाइनरी के क्रेडिट पर गहलोत-भजनलाल आमने-सामने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बालोतरा दौरे से पहले राजस्थान की राजनीति गरमा गई है।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
July 4, 2026 • 11:02 AM | Barmer  1
राजस्थान
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PM मोदी के बालोतरा दौरे से पहले सियासी संग्राम: हरीश चौधरी ने रखीं दो बड़ी मांगें, रिफाइनरी के क्रेडिट पर गहलोत-भजनलाल आमने-सामने
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PM मोदी के बालोतरा दौरे से पहले सियासी संग्राम: हरीश चौधरी ने रखीं दो बड़ी मांगें, रिफाइनरी के क्रेडिट पर गहलोत-भजनलाल आमने-सामने
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Kashish Sain
1 hour ago
रिफाइनरी उद्घाटन से पहले कांग्रेस का हमला, क्रेडिट की राजनीति और स्थानीय रोजगार पर घेरा सरकार
रिफाइनरी उद्घाटन से पहले कांग्रेस का हमला, क्रेडिट की राजनीति और स्थानीय रोजगार पर घेरा सरकार

टीकाराम जूली ने बीजेपी पर साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पचपदरा रिफाइनरी परियोजना की शुरुआत यूपीए सरकार के समय हुई थी और कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इसका 80–85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी का लोकार्पण स्वागतयोग्य है, लेकिन इसका पूरा श्रेय केवल बीजेपी नहीं ले सकती।

स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग

टीकाराम जूली ने बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर और पूरे मारवाड़ के युवाओं को रिफाइनरी में रोजगार में पहली प्राथमिकता देने की मांग की। साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नाम पर बाड़मेर में पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी स्थापित करने का सुझाव दिया।

परियोजना की लागत बढ़ने का मुद्दा उठाया

जूली ने आरोप लगाया कि रिफाइनरी की शुरुआती लागत करीब 39 हजार करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि परियोजना में हुई देरी का आर्थिक बोझ जनता पर पड़ा।

ईआरसीपी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा, पेपर लीक पर रोक और हरियाणा के बराबर पेट्रोल-डीजल के दाम जैसे वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने ईआरसीपी के लिए अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं दी।

अशोक गहलोत ने रिफाइनरी के इतिहास पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान का विरोध किया, जिसमें रिफाइनरी का शिलान्यास 2018 में होने की बात कही गई थी। गहलोत ने कहा कि वास्तविक शिलान्यास वर्ष 2013 में यूपीए सरकार के दौरान हुआ था और इसके समर्थन में उन्होंने पुरानी तस्वीरें भी साझा कीं।

गहलोत बोले- देरी से दोगुनी हुई परियोजना की लागत

गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद परियोजना कई वर्षों तक रुकी रही, जिससे इसकी लागत करीब 37 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

हरीश चौधरी ने रखीं दो बड़ी मांगें

बायतु विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि स्थानीय विधायक होने के बावजूद उन्हें कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने CSR फंड में कटौती पर पुनर्विचार और एचआरआरएल रिफाइनरी से जुड़े पेट्रोकेमिकल ज़ोन के लिए टैक्स में छूट देने की मांग की।

बालोतरा दौरे पर सबकी नजरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बालोतरा में एचआरआरएल (HRRL) पचपदरा रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। उद्घाटन से पहले ही रिफाइनरी के इतिहास, क्रेडिट, स्थानीय रोजगार और विकास को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूरे दिन इस घटनाक्रम से जुड़े सभी बड़े अपडेट यहां मिलते रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 4 जुलाई को प्रस्तावित बालोतरा दौरे और एचआरआरएल (HRRL) पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण से पहले राजस्थान की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। एक तरफ बायतु विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया के जरिए थार क्षेत्र के विकास से जुड़ी दो अहम मांगें प्रधानमंत्री के सामने रखी हैं, तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने रिफाइनरी के इतिहास, क्रेडिट और परियोजना में हुई देरी को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।

हरीश चौधरी बोले- निमंत्रण नहीं मिला, इसलिए सोशल मीडिया से रखीं मांगें

बायतु विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का थार क्षेत्र में स्वागत करते हुए लिखा कि स्थानीय विधायक होने के बावजूद उन्हें कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसी माध्यम से वे क्षेत्र की जनता की आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने पहली मांग में कहा कि रिफाइनरी जैसी बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत मिलने वाली राशि में हुई कटौती पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि स्थानीय विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकें।

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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