सरकार का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा खपत और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए भवन निर्माण क्षेत्र में नई तकनीकों और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
नई नीति के तहत बड़े भवनों की छतों का कम से कम आधा हिस्सा सोलर प्लांट लगाने के लिए सुरक्षित रखना होगा। इससे भवन अपनी बिजली की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा स्वयं पूरा कर सकेंगे और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिजली की बचत के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी और राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी।
ईवी चार्जिंग स्टेशन होंगे अनिवार्य
सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रही है। नए बिल्डिंग कोड के अनुसार बड़े व्यावसायिक भवनों और मल्टीस्टोरी परिसरों में ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि भविष्य में बढ़ने वाले ईवी उपयोगकर्ताओं को सुविधाएं मिल सकें।
किन भवनों पर लागू होंगे नए नियम
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने समीक्षा बैठक के दौरान बताया कि यह कोड मुख्य रूप से उन व्यावसायिक भवनों पर लागू होगा जिनका:
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बिल्ट-अप एरिया 2000 वर्ग मीटर या उससे अधिक हो।
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कनेक्टेड लोड 100 किलोवाट या उससे अधिक हो।
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कनेक्टेड डिमांड 120 केवीए या उससे अधिक हो।
ऐसे भवनों को ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण मानकों का पालन करना होगा।
उल्लंघन करने पर लगेगा जुर्माना
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिल्डिंग कोड के नियमों की अनदेखी करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। नियमों का पालन नहीं करने पर आर्थिक दंड और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है।
इसका उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं बल्कि उन्हें प्रभावी रूप से लागू करना भी है।
पहली बार मिलेगी अतिरिक्त निर्माण की छूट
राजस्थान में पहली बार पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना भी लाई जा रही है।
नए प्रस्ताव के अनुसार:
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प्लस मानकों का पालन करने वाले भवनों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त बिल्ट एरिया रेश्यो (BAR/FAR) मिलेगा।
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सुपर बिल्डिंग कोड मानकों को पूरा करने वाले भवनों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिल्ट एरिया रेश्यो की छूट दी जाएगी।
यह प्रावधान बिल्डर्स और निवेशकों को हरित भवन निर्माण के लिए प्रेरित करेगा।
ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण पर फोकस
राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम इस योजना को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। सरकार का लक्ष्य ऐसे भवन विकसित करना है जो कम ऊर्जा खपत करें, अधिक ऊर्जा उत्पादन करें और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालें।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कोड आने वाले वर्षों में राजस्थान को ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकता है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई नीति
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस कोड को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने के लिए विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और आम लोगों से सुझाव लिए जाएं।
सरकार का मानना है कि यह नीति केवल ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य के स्मार्ट शहरों, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।