सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी, लूणी और बांडी नदियों के गंभीर प्रदूषण पर जताई तीखी नाराजगी, कहा- 20 लाख लोग हो रहे प्रभावित, अब कागजी वादे नहीं चलेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी, लूणी और बांडी नदियों में औद्योगिक प्रदूषण की भयावह स्थिति पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि 20 लाख लोग प्रभावित हैं, सीईटीपी बायपास हो रहे हैं और अब कागजी वादे नहीं चलेंगे। एनजीटी के 2 करोड़ जुर्माने पर राहत देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने 21 नवंबर 2025 तक ठोस सुधार के आदेश दिए, वरना और सख्त निर्देश जारी होंगे।
जोधपुर/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की तीन प्रमुख नदियों — जोजरी, लूणी और बांडी — में लगातार बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण पर गहरी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि जोधपुर, पाली, बालोतरा और आसपास के इलाकों में करीब 20 लाख लोगों की सेहत और आजीविका पर संकट मंडरा रहा है क्योंकि उद्योगों का जहरीला अपशिष्ट सीधे नदियों में डाला जा रहा है और ज्यादातर कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) को बायपास कर दिया गया है।न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की अवकाश पीठ ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश की, लेकिन कोर्ट ने इसे देखते हुए कहा कि स्थिति पहले से भी ज्यादा गंभीर हो चुकी है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा:“राज्य में प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति अत्यंत दयनीय है।”
“औद्योगिक इकाइयां सीधे नदियों में केमिकल युक्त गंदा पानी छोड़ रही हैं।”
“अब सिर्फ कागजी आश्वासन और प्रस्तुतीकरण नहीं चलेंगे, धरातल पर ठोस काम दिखना चाहिए।”