किसानों को मिलेगा फसलों का बेहतर दाम: 14 खरीफ फसलों की MSP में वृद्धि, KCC पर सस्ता लोन, और बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
केंद्र सरकार ने 28 मई 2025 को किसानों और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए। 14 खरीफ फसलों (धान, कपास, मक्का, आदि) की MSP में बढ़ोतरी की गई, जिसमें धान की MSP 2,369 रुपये और कपास की 7,710-8,110 रुपये तय की गई। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर 7% ब्याज दर के साथ 3 लाख तक का लोन और समय पर चुकाने पर 4% प्रभावी ब्याज दर की सुविधा 2025-26 तक जारी रहेगी। आंध्र प्रदेश में बडवेल-नेल्लोर के बीच 3,653 करोड़ रुपये की लागत से 108 किमी फोर-लेन हाईवे और मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र में 3,399 करोड़ रुपये की दो रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। ये कदम किसानों की आय, खेती की स्थिरता, और आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगे।
केंद्र सरकार ने 28 मई 2025 को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में किसानों और बुनियादी ढांचे के लिए कई अहम निर्णय लिए। इनमें 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की ब्याज सब्सिडी योजना को जारी रखना, और दो बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी शामिल हैं। आइए इन फैसलों को सरल और विस्तृत रूप में समझते हैं।
खरीफ फसलों की MSP में बढ़ोतरी: किसानों को उचित मूल्य
सरकार ने 2025-26 खरीफ सीजन के लिए 14 फसलों की MSP में वृद्धि की है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिले और खेती लाभकारी बने। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि MSP को फसल की लागत से कम से कम 50% अधिक रखा गया है, जिससे किसानों को आर्थिक स्थिरता मिले।
- धान: नई MSP 2,369 रुपये प्रति क्विंटल, जो पिछले साल से 69 रुपये अधिक है।
- कपास: मध्यम रेशे वाली कपास की MSP 7,710 रुपये और लंबे रेशे वाली की 8,110 रुपये, जो 589 रुपये अधिक है।
- अन्य फसलें: मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी, तिल, रागी, नाइजरसीड, और जूट की MSP भी बढ़ाई गई।
- वित्तीय प्रभाव: इस वृद्धि से सरकार पर 2.07 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जो पिछले सीजन से 7,000 करोड़ रुपये अधिक है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह तय कीमत है, जो सरकार किसानों को उनकी फसल के लिए देती है, चाहे बाजार में कीमतें कम हों। यह किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाता है। MSP का निर्धारण कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सलाह पर होता है। इसमें 23 फसलें शामिल हैं: 7 अनाज (धान, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, जौ), 5 दालें (चना, अरहर, मूंग, उड़द, मसूर), 7 तिलहन (मूंगफली, सोयाबीन, तिल, सूरजमुखी, सरसों, कुसुम, नाइजरसीड), और 4 व्यावसायिक फसलें (कपास, गन्ना, खोपरा, जूट)।