हादसा कब और कहाँ हुआ?
हादसा कोटपूतली के बीडीएम हॉस्पिटल के सामने फ्लाईओवर/पुल पर बुधवार रात करीब 11:26 बजे हुआ। बस हाईवे पर चढ़ते समय अचानक सामने खड़े ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रेलर में लदे लोहे के सरिए (आयरन रॉड्स) बस के केबिन को चीरते हुए अंदर तक घुस गए। इससे बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
बस में कितनी सवारियाँ थीं?
बस में कुल 22 यात्री सवार थे। बस मकराना (नागौर) से हरिद्वार जा रही थी। दूसरे ड्राइवर ओमप्रकाश के अनुसार, हादसे के समय बस फ्लाईओवर चढ़ रही थी। अचानक सामने खड़ा ट्रेलर नजर आया, लेकिन ब्रेक लगाने के बावजूद बस उसमें घुस गई।
ट्रेलर ड्राइवर ने न तो पार्किंग का बोर्ड लगाया था और न ही कोई इंडिकेटर या चेतावनी के संकेत दिए थे। रात का अंधेरा और ट्रेलर का अचानक खड़ा होना हादसे का मुख्य कारण बना।
हादसे में कौन-कौन मारे गए?
चंद्रमोहन (55 वर्ष) - बस ड्राइवर, निवासी लाड़ौली गांव, नागौर, बिच्छू देवी - यात्री (महिला), दोनों की मौत मौके पर ही हो गई।
घायलों की स्थिति
हादसे में 16 यात्री घायल हुए। सभी को तुरंत कोटपूतली के राजकीय बीडीएम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश घायलों को छुट्टी दे दी गई। कुछ यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही थी, लेकिन विस्तृत जानकारी बाद में मिली।
मौके पर क्या हुआ?
टक्कर के बाद बस में चीख-पुकार मच गई। आसपास रहने वाले लोगों ने तेज आवाज सुनकर तुरंत मौके पर पहुंचकर यात्रियों को बस से बाहर निकालने में मदद की। कई यात्री बस के अंदर फंस गए थे, जिन्हें निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। बस इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी कि उसके केबिन का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया था।
पुलिस की कार्रवाई
कोटपूतली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और ट्रेलर को हाईवे के किनारे हटाकर ट्रैफिक सुचारू करवाया गया। हादसे के कारण कुछ देर के लिए हाईवे पर ट्रैफिक जाम लगा रहा।
ट्रेलर ड्राइवर हादसे के तुरंत बाद मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। एसएचओ राजेश शर्मा ने बताया कि ट्रेलर ड्राइवर की तलाश की जा रही है और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हादसे के कारण
प्रारंभिक जांच में मुख्य कारण ट्रेलर का बिना किसी चेतावनी के हाईवे पर खड़ा होना बताया जा रहा है। रात का समय, तेज रफ्तार और ट्रेलर पर कोई रिफ्लेक्टर या इंडिकेटर न होना भी हादसे को न्योता देने वाला साबित हुआ।