“नाले पर खड़ी इमारत या कागज़ों का खेल? जयपुर रोड का सच क्या छुपा रहा है…”
जयपुर रोड पर एक निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जहां प्रशासन और शिकायतकर्ता आमने-सामने हैं। एक तरफ अधिकारियों का दावा है कि सब कुछ नियमों के तहत हुआ, वहीं दूसरी ओर आरोप है कि नाले और उसके बफर जोन पर अतिक्रमण कर सच्चाई छिपाई जा रही है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि असल स्थिति को दबाकर गलत जानकारी दी गई, जबकि इलाके में नाले को पाटने, दीवारें खड़ी करने और यहां तक कि बीच में निर्माण करने तक की बातें सामने आ रही हैं। मामला तब और पेचीदा हो गया जब अधिकारियों ने 9 मीटर बफर जोन का पालन होने की बात कही, जिसे अब चुनौती दी जा रही है। अब सवाल उठ रहा है—क्या यह सिर्फ कागज़ों में सही दिखाया गया निर्माण है या जमीन पर कुछ और ही सच छिपा है? जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन असली कहानी क्या है… इसका खुलासा अभी बाकी है।
राजस्थान में एक बार फिर निर्माण कार्यों और नियमों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जयपुर रोड पर स्थित एक निर्माण को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है, जहां एक तरफ प्रशासन इसे नियमों के तहत बता रहा है, तो दूसरी ओर शिकायतकर्ता गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
शुरुआत विवाद से
पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब एडीए कमिश्नर (IAS) के. नित्या की ओर से यह दावा किया गया कि संबंधित बिल्डिंग नाले पर नहीं बनी है और निर्माण पूरी तरह नियमों के अनुसार किया गया है।
लेकिन इसी बयान के बाद विवाद और गहरा गया। शिकायतकर्ता ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा कि अधिकारियों को गलत जानकारी दी गई है और वास्तविक स्थिति इससे अलग है।