खाटूश्यामजी में जल झुलनी एकादशी पर उमड़ा आस्था का सैलाब,लाखों भक्त बाबा के दर्शन करने पहुंचे.
जल झुलनी एकादशी पर खाटूश्यामजी धाम में लाखों भक्तों का सैलाब उमड़ा। बाबा श्याम और गोपीनाथ भगवान के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगीं। रींगस से दंडवत यात्रा और चांदी की पालकी में गोपीनाथ की शोभा यात्रा ने भक्ति का अद्भुत माहौल बनाया। भगवान विष्णु की कृपा से यह पर्व पापों का नाश और मोक्ष प्रदान करता है।
सीकर, राजस्थान: जल झुलनी एकादशी के पावन अवसर पर खाटूश्यामजी धाम में भक्ति, श्रद्धा और विश्वास का अनुपम संगम देखने को मिला। देश के कोने-कोने से लाखों श्याम भक्त बाबा श्याम के दर्शन के लिए खाटू नगरी पहुंचे, जिससे यह तीर्थ स्थल भक्तों की भीड़ से खचाखच भर गया। मंदिर परिसर से लेकर आसपास की गलियों तक पैर रखने की जगह नहीं बची। होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं भक्तों से भरी हुई हैं, और कई भक्त रींगस से दंडवत यात्रा करते हुए बाबा के दरबार तक पहुंचे। इस पवित्र दिन पर बाबा श्याम के साथ-साथ गोपीनाथ भगवान की चांदी की पालकी में निकलने वाली शोभा यात्रा ने भक्तों के मन को मोह लिया।
जल झुलनी एकादशी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में जल झुलनी एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जोड़ा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण के जन्म के बाद इस दिन उनकी प्रतिमा को गाजे-बाजे के साथ जल विहार के लिए ले जाया जाता है। इस अवसर पर खाटूश्यामजी मंदिर में बाबा श्याम को नई और आकर्षक पोशाक धारण कराकर उनका भव्य श्रृंगार किया जाता है। कई भक्त सालों तक अपनी बारी का इंतजार करते हैं ताकि वे अपने आराध्य को पोशाक भेंट कर सकें। यह एकादशी भगवान विष्णु की कृपा से समस्त पापों का नाश करने और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। इसे परिवर्तिनी, पद्मा और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा में करवट लेते हैं।