जैसलमेर की महिला पुलिसकर्मी एक हाथ से संभाल रहीं ड्यूटी, दूसरे से बच्चों का भविष्य... जानिए पूरी कहानी
मरुस्थल की कठिन ड्यूटी, लंबी रातें और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी… लेकिन इन सबके बीच महिला पुलिसकर्मी जिस तरह मां और वर्दी दोनों का फर्ज निभा रही हैं, उसकी तस्वीरें हर किसी को भावुक कर रही हैं।
पोकरण/जैसलमेर: खाकी वर्दी को अक्सर सख्ती, अनुशासन और कानून व्यवस्था की पहचान माना जाता है, लेकिन जैसलमेर के पोकरण और भणियाणा क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें इस वर्दी का एक बेहद भावुक और संवेदनशील चेहरा भी दिखा रही हैं। यहां तैनात महिला कांस्टेबल इन दिनों मातृत्व और पुलिस सेवा के बीच ऐसा संतुलन बना रही हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। मदर्स डे के मौके पर सामने आई ये कहानियां बता रही हैं कि मां चाहे घर में हो या ड्यूटी पर, उसकी जिम्मेदारियां कभी कम नहीं होतीं। मरुस्थलीय इलाके की कठिन परिस्थितियों, लंबी ड्यूटी और लगातार सतर्कता के बीच महिला पुलिसकर्मी अपने बच्चों की परवरिश भी पूरी जिम्मेदारी से कर रही हैं। कहीं थाने के कमरे में मां की गोद में बच्चा नजर आता है, तो कहीं पेट्रोलिंग के बीच बच्चों की चिंता चेहरे पर साफ दिखाई देती है। इन दृश्यों ने हर किसी को भावुक कर दिया।
थाने में ड्यूटी के साथ मां का दुलार
भणियाणा थाने में तैनात महिला कांस्टेबल मीना चौधरी अपने सात वर्षीय बेटे रियांशु की देखभाल के साथ पुलिस सेवा निभा रही हैं। स्कूल की छुट्टी के बाद कई बार उनका बेटा थाने पहुंच जाता है। उस समय थाने का माहौल केवल अनुशासन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वहां मां की ममता भी दिखाई देती है।
मीना चौधरी बताती हैं कि पुलिस सेवा में समय का कोई तय दायरा नहीं होता। कई बार अचानक ड्यूटी बढ़ जाती है और रातभर सक्रिय रहना पड़ता है। लेकिन जब बेटा मुस्कुराकर गले लगाता है, तो सारी थकान खत्म हो जाती है। उनके अनुसार मां होना और पुलिसकर्मी होना दोनों ही बड़ी जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें संतुलित करना आसान नहीं, लेकिन असंभव भी नहीं।