जालोर जिले के ग्रेनाइट उद्योग से जुड़े सबसे बड़े और प्रभावशाली संगठन जालोर ग्रेनाइट एसोसिएशन के हालिया चुनाव परिणामों ने क्षेत्र में खासी चर्चा बटोरी है। सोमवार को हुई मतगणना के दौरान रामकिशन रणवां ने पूर्व अध्यक्ष लाल सिंह राठौड़ को मात देते हुए अध्यक्ष पद पर विजय प्राप्त की। यह चुनाव ग्रेनाइट उद्यमियों के बीच कड़ी टक्कर का प्रतीक रहा, जहां कुल 1032 मतदाताओं में से 1025 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
चुनाव की पृष्ठभूमि और मतदान प्रक्रिया
जालोर ग्रेनाइट एसोसिएशन के सत्र 2026-28 के लिए यह चुनाव रविवार, 18 जनवरी 2026 को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। चुनाव समिति के सहयोजक राजेंद्र मेहता के अनुसार, मतदान में भारी उत्साह देखा गया और लगभग पूर्ण भागीदारी रही। अध्यक्ष पद के लिए मुख्य मुकाबला पूर्व अध्यक्ष लाल सिंह राठौड़ (जो पहले से पद संभाल चुके थे) और रामकिशन रणवां (जो पहली बार इस पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे) के बीच था। दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों ने ग्रेनाइट फैक्टरियों का दौरा कर मतदाताओं से संपर्क साधा था, जिससे चुनाव में रोमांच बना रहा।
मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे ग्रेनाइट एसोसिएशन भवन में शुरू हुई। परिणामों की घोषणा का इंतजार करते हुए दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों की बड़ी संख्या मतगणना स्थल पर जमा हो गई थी।
मतगणना के दौरान रामकिशन रणवां की लगातार बढ़त
मतगणना के शुरुआती राउंड से ही रामकिशन रणवां बढ़त में नजर आए। विभिन्न राउंड्स में उनकी लीड बनी रही:चौथे राउंड तक की गिनती में रामकिशन रणवां 55 वोट आगे चल रहे थे। इस राउंड में लाल सिंह राठौड़ को 371 वोट मिले, जबकि रामकिशन रणवां को 426 वोट प्राप्त हुए।
अंतिम परिणाम में रामकिशन रणवां को 547 वोट मिले, जबकि लाल सिंह राठौड़ को 474 वोट प्राप्त हुए। इस प्रकार रामकिशन रणवां ने 73 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।पूरे मतगणना सत्र में रामकिशन रणवां पहले राउंड से ही लगातार आगे बने रहे, जिससे उनके समर्थकों में उत्साह बढ़ता गया।
विवाद और हंगामा: मतगणना केंद्र पर तनाव
परिणाम घोषित होते ही स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जैसे ही रामकिशन रणवां की जीत की घोषणा हुई, हारे हुए प्रत्याशी लाल सिंह राठौड़ के समर्थकों ने मतगणना केंद्र में घुसने की कोशिश की। इस दौरान समर्थक और पुलिस बल आमने-सामने हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।लाल सिंह राठौड़ ने चुनाव परिणामों पर आपत्ति दर्ज कराई और दोबारा मतगणना की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी वोटरों की सूची जारी की गई थी, जिससे चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता हुई। यह विवाद अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।