जोजरी नदी प्रदूषण: धवा गांव में विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्रामीण महिलाओं का अनोखा विरोध

जोधपुर के धवा गांव में विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्रामीण महिलाओं ने जोजरी नदी के प्रदूषण के खिलाफ अनोखा विरोध किया। 'वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान' के तहत आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने पोस्टर लहराकर नदी की सफाई की मांग की। जोजरी नदी औद्योगिक कचरे से जहरीली हो चुकी है, जिससे खेती, पशुधन और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने 176 करोड़ की योजना की घोषणा की, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ठोस कार्रवाई जरूरी है। मेलबा तालाब की सफाई को ग्रामीणों की मेहनत का उदाहरण बताया गया।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
June 5, 2025 • 7:00 PM  118
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जोजरी नदी प्रदूषण: धवा गांव में विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्रामीण महिलाओं का अनोखा विरोध
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5 Jun 2025
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जोजरी नदी प्रदूषण: धवा गांव में विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्रामीण महिलाओं का अनोखा विरोध

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजस्थान के जोधपुर जिले के लूणी विधानसभा क्षेत्र के धवा गांव में एक अनोखा और विचारोत्तेजक दृश्य देखने को मिला। जहां एक ओर सरकारी अधिकारी ‘वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान’ के तहत जल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने पहुंचे, वहीं दूसरी ओर गांव की महिलाएं जोजरी नदी के प्रदूषण के खिलाफ स्लोगन लिखे पोस्टर लेकर विरोध में डट गईं। उनके पोस्टरों पर लिखा था—“जोजरी से बचाओ, फिर पर्यावरण दिवस मनाओ”। इस विरोध ने न केवल अधिकारियों को असहज कर दिया, बल्कि जोजरी नदी के बदहाल हालात को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।

विरोध का कारण: जोजरी नदी का ज़हरीला पानी

जोजरी नदी, जो कभी जोधपुर और आसपास के गांवों के लिए जीवनदायिनी थी, आज औद्योगिक कचरे और बिना उपचारित सीवेज के कारण एक जहरीले नाले में तब्दील हो चुकी है। टेक्सटाइल, डाई, स्टील और रंगाई-छपाई उद्योगों से निकलने वाला अपशिष्ट जल बिना किसी शुद्धिकरण के सीधे नदी में डाला जा रहा है। नदी के पानी में लेड, क्रोमियम, कैडमियम, कॉपर, मरकरी और रासायनिक रंगों की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। इसके दुष्परिणाम स्पष्ट हैं:

  • कृषि पर असर: खेत बंजर हो रहे हैं और फसलों की पैदावार बर्बाद हो रही है।
  • पशुधन को नुकसान: मवेशियों की असामयिक मौतें हो रही हैं।
  • स्वास्थ्य समस्याएं: ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे बच्चों और वयस्कों में बीमारियां बढ़ रही हैं।
  • पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश: जल जीवों और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।

ग्रामीण महिलाओं का गुस्सा यही था कि जब उनकी जीवनरेखा जोजरी नदी ही ज़हर बन चुकी है, तो पर्यावरण दिवस जैसे आयोजनों का क्या मतलब? उन्होंने मांग की, “जोजरी नदी हमारी गंगा है, पहले इसे साफ करो, फिर हमारे गांव में ऐसे कार्यक्रम करो।”

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