बाड़मेर के मालाना में ढहाया गया धार्मिक स्थल; छावनी बना गांव, मौलवी बोले- 'हमारा पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं'

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से सटे 50 किमी दायरे में अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी है।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 19, 2026 • 5:00 PM  6
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राजस्थान
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बाड़मेर के मालाना में ढहाया गया धार्मिक स्थल; छावनी बना गांव, मौलवी बोले- 'हमारा पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं'
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बाड़मेर के मालाना में ढहाया गया धार्मिक स्थल; छावनी बना गांव, मौलवी बोले- 'हमारा पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं'

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 50 किलोमीटर के दायरे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने का महा-अभियान चल रहा है। इसी कार्रवाई के तहत गुरुवार दोपहर बाड़मेर जिले के गडरारोड इलाके के मालाना गांव में प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गोचर भूमि पर बने एक धार्मिक स्थल को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद से ही सीमावर्ती इलाके में स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच ऐतराज और तनाव की स्थिति बनी हुई है। दैनिक भास्कर की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीनी हकीकत जानी और स्थानीय लोगों से बातचीत की।

गांव में रही नाकेबंदी, घरों के अंदर कैद रहे लोग

कार्रवाई को शांतिपूर्ण तरीके से अंजाम देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने मालाना गांव को छावनी में तब्दील कर दिया था। मौके पर मौजूद डिप्टी एसपी मानाराम गर्ग के नेतृत्व में पुलिस ने जगह-जगह नाके लगाए और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। स्थानीय मौलवी हासम खान के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान प्रशासन का रुख बेहद सख्त था; गांव के लोगों को अपने घरों की खिड़कियां तक खोलने की इजाजत नहीं थी और सभी से घरों के भीतर ही रहने की अपील की गई थी।

मदरसा सुरक्षित, सिर्फ धार्मिक स्थल पर चला पीला पंजा

मालाना गांव के मौलवी हासम खान ने बताया कि प्रशासन ने केवल 2 साल पहले बने धार्मिक स्थल को ध्वस्त किया है, जबकि पास ही में चल रहे मदरसे को हाथ नहीं लगाया गया है। उन्होंने बताया कि यह मदरसा साल 2009 से संचालित हो रहा है, जहां बच्चों को सामान्य शिक्षा और धार्मिक तालीम दोनों दी जाती है। इस मदरसे को सरकार से पांचवीं कक्षा तक की मान्यता भी मिली हुई है।

सरकारी फंड से बना मदरसा, चंदे से बना था धर्मस्थल

जमीन के मालिकाना हक को लेकर मौलवी हासम खान ने दावा किया कि जब यह मदरसा बना था, तब यह जमीन आबादी भूमि में दर्ज थी और यह क्षेत्र जैसिंधर ग्राम पंचायत के तहत आता था। बाद में मालाना अलग पंचायत बन गई। उनके पास गडरारोड पंचायत समिति द्वारा जारी आधिकारिक पट्टा भी मौजूद है। पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के कार्यकाल के दौरान इस मदरसे की बिल्डिंग के लिए 15 लाख रुपए का सरकारी फंड स्वीकृत हुआ था। हासम खान ने साफ किया कि सरकारी पैसे से सिर्फ मदरसा बना था, जबकि ध्वस्त किए गए धार्मिक स्थल का निर्माण ग्रामीणों और रिश्तेदारों से चंदा जुटाकर किया गया था।

बैकडेट नोटिस देने का लगाया आरोप

मौलवी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें कानूनन जवाब देने का पूरा मौका नहीं दिया। उन्होंने कहा, "हमें पटवारी रमेश ने 17 जून की शाम को एक नोटिस थमाया, जिस पर बैकडेट यानी 11 जून की तारीख लिखी हुई थी। नोटिस में 18 जून तक जवाब पेश करने को कहा गया था। गुरुवार 18 जून को जब हम अपना पक्ष रखने और जवाब देने गडरारोड प्रशासनिक मुख्यालय गए, तो पीछे से पुलिस और प्रशासन की टीम ने मालाना गांव पहुंचकर सीधे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी।" हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस धर्मस्थल को लेकर 6-7 महीने पहले भी एक नोटिस मिला था, जिसका लिखित जवाब वे पहले ही दे चुके थे।

हमारा पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं, देश के प्रति पूरी निष्ठा

कार्रवाई के बाद उपजे हालातों पर दुख जताते हुए मौलवी हासम खान ने कहा कि प्रशासन और सरकार ने ग्रामीणों को परेशान करने के लिए यह रुख अपनाया है। उन्होंने दृढ़ता से कहा, "हमारा या इस सीमावर्ती गांव के किसी भी नागरिक का पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं है। हमारा परिवार और हमारा पूरा समाज इसी भारत भूमि की मिट्टी में पैदा हुआ है और यहीं रहेगा। हम इस देश के नागरिक हैं और भारत देश के प्रति पूरी निष्ठा और वफादारी रखते हैं।"

गौरतलब है कि सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से सटे जिलों में 50 किलोमीटर के दायरे में हुए सभी अतिक्रमणों और संदिग्ध निर्माणों का सर्वे करने और उन्हें हटाने का सख्त आदेश दिया है, जिसके तहत बाड़मेर जिला प्रशासन लगातार सीमावर्ती गांवों में गोचर व सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त करा रहा है।

Kashish Sain

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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