बाड़मेर के मालाना में ढहाया गया धार्मिक स्थल; छावनी बना गांव, मौलवी बोले- 'हमारा पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं'
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से सटे 50 किमी दायरे में अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी है।
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 50 किलोमीटर के दायरे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने का महा-अभियान चल रहा है। इसी कार्रवाई के तहत गुरुवार दोपहर बाड़मेर जिले के गडरारोड इलाके के मालाना गांव में प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गोचर भूमि पर बने एक धार्मिक स्थल को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद से ही सीमावर्ती इलाके में स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच ऐतराज और तनाव की स्थिति बनी हुई है। दैनिक भास्कर की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीनी हकीकत जानी और स्थानीय लोगों से बातचीत की।
गांव में रही नाकेबंदी, घरों के अंदर कैद रहे लोग
कार्रवाई को शांतिपूर्ण तरीके से अंजाम देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने मालाना गांव को छावनी में तब्दील कर दिया था। मौके पर मौजूद डिप्टी एसपी मानाराम गर्ग के नेतृत्व में पुलिस ने जगह-जगह नाके लगाए और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। स्थानीय मौलवी हासम खान के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान प्रशासन का रुख बेहद सख्त था; गांव के लोगों को अपने घरों की खिड़कियां तक खोलने की इजाजत नहीं थी और सभी से घरों के भीतर ही रहने की अपील की गई थी।
मदरसा सुरक्षित, सिर्फ धार्मिक स्थल पर चला पीला पंजा
मालाना गांव के मौलवी हासम खान ने बताया कि प्रशासन ने केवल 2 साल पहले बने धार्मिक स्थल को ध्वस्त किया है, जबकि पास ही में चल रहे मदरसे को हाथ नहीं लगाया गया है। उन्होंने बताया कि यह मदरसा साल 2009 से संचालित हो रहा है, जहां बच्चों को सामान्य शिक्षा और धार्मिक तालीम दोनों दी जाती है। इस मदरसे को सरकार से पांचवीं कक्षा तक की मान्यता भी मिली हुई है।