‘विधवा का दर-दर भटकना कानून की हत्या करने जैसा’: झुंझुनूं कंज्यूमर कोर्ट ने LIC पर लगाई पेनल्टी, क्लेम प्रक्रिया पर उठाए सवाल
झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने LIC की कार्यशैली पर सख्त टिप्पणी करते हुए किसान की विधवा को लंबे समय तक बीमा क्लेम से वंचित रखने को “कानून की आत्मा की हत्या” बताया। आयोग ने LIC पर जुर्माना लगाते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया।
झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसले में सख्त टिप्पणी की है। आयोग ने कहा कि बीमा क्लेम के नाम पर उपभोक्ताओं को वर्षों तक कानूनी पचड़ों में उलझाना “उपभोक्ता संरक्षण कानून की आत्मा की हत्या” जैसा है।
आयोग ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें एक किसान की मृत्यु के बाद उसकी विधवा को लगभग 9 साल 4 महीने तक बीमा राशि पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने सुनवाई के दौरान कहा कि ग्रामीण और किसान वर्ग से बीमा प्रीमियम समय पर वसूला जाता है, लेकिन क्लेम के समय उन्हें अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है।