खेजड़ी सिर्फ पेड़ नहीं रेगिस्तान के जीवन का आधार है

खेजड़ी, रेगिस्तान की आत्मा और राजस्थान का राज्य वृक्ष, सोलर और विंड कंपनियों की अंधाधुंध कटाई से संकट में है। बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमी इसके बचाव के लिए संघर्षरत हैं।

Web Desk
Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
August 4, 2025 • 7:25 PM  97
राजस्थान
NEWS CARD
Logo
खेजड़ी सिर्फ पेड़ नहीं रेगिस्तान के जीवन का आधार है
“खेजड़ी सिर्फ पेड़ नहीं रेगिस्तान के जीवन का आधार है”
Favicon
Read more on thekhatak.com
4 Aug 2025
https://thekhatak.com/khejri-is-the-basis-of-desert-life-not-just-trees
Google News
Copied
खेजड़ी सिर्फ पेड़ नहीं रेगिस्तान के जीवन का आधार है

रेगिस्तान की तपती रेत में, जहां सूरज की आग धरती को झुलसाती है, खेजड़ी का वृक्ष सदियों से एक मूक रक्षक की तरह खड़ा है। यह राजस्थान का राज्य वृक्ष है, जिसे 31 अक्टूबर 1983 को यह सम्मान मिला। खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि थार के रेगिस्तान में जीवन की धड़कन है। इसकी सांगरी, पत्तियां, छाल और छांव ने न जाने कितनी पीढ़ियों को अकाल, गर्मी और अभावों से बचाया। लेकिन आज, यह वृक्ष अपनी ही धरती पर मृत्यु की कगार पर खड़ा है। सोलर और विंड एनर्जी कंपनियों की लालच और प्रशासन की उदासीनता ने खेजड़ी और इसके साथी वृक्षों—रोहिड़ा, जाल, कुमट, और केर—को संकट में डाल दिया है। यह खबर खेजड़ी की उस अनकही पीड़ा की गूंज है, जो हमसे पूछ रही है: क्या हम अपनी धरोहर को यूं ही मिटने देंगे?

खेजड़ी: मरुस्थल का जीवनदाता

खेजड़ी (प्रोसोपिस सिनेरिया) को मरुस्थल का कल्पवृक्ष कहा जाता है। इसकी जड़ें रेत में नाइट्रोजन संरक्षित करती हैं, जिससे बंजर भूमि भी उपजाऊ बनती है। इसकी पत्तियां पशुओं का चारा हैं, और सांगरी की फलियां स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन देती हैं। इसकी छाल और गोंद आयुर्वेद में गठिया, जोड़ों के दर्द और गैस जैसी बीमारियों का इलाज करती हैं। सबसे बड़ी बात, यह वृक्ष सूखे में भी हरा-भरा रहता है, और इसकी छांव रेगिस्तान की तपन में राहगीरों और पशुओं के लिए ठंडक का आलम है।

खेजड़ी का महत्व सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं। यह बिश्नोई समाज की आस्था का प्रतीक है। वेदों में इसे शमी वृक्ष के रूप में पूजा जाता है, जो विजय और शक्ति का प्रतीक है। दशहरे पर शमी की पूजा और होलिका दहन में इसकी शाखाएं इसकी पवित्रता की गवाही देती हैं। गोगाजी जैसे लोकदेवताओं के थानों से भी यह जुड़ा है, जहां हर शनिवार इसकी पूजा होती है। खेजड़ी रेगिस्तान के लोगों की आत्मा में बसी है, और इसकी हर डाल में उनकी कहानियां सांस लेती हैं।

Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Web Desk The Khatak

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter